मुंबई, 01 सितंबर (अमरनाथ प्रसाद)
-मलेशिया में कन्नड़ कहले: कन्नड़ को विश्वस्तरीय सांस्कृतिक उत्सव और वैश्विक पहचान दिलाने का सच्चा प्रयास
20 अगस्त 2025 को, कुआलालंपुर, मलेशिया के रॉयल चुलान होटल में सुधा वेंचर्स द्वारा कर्नाटक सरकार के कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से प्रतिष्ठित “कन्नड़ कहले” कार्यक्रम और “वर्ल्ड बेस्ट कन्नडिगा अवॉर्ड 2025” का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिवराज तंगडगी (कर्नाटक सरकार के कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री), मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त डॉ. श्री बी. एन. रेड्डी, सुरेंद्र कुमार हेगड़े, और आनंद संकेश्वर (वी.आर.एल. डायरेक्टर) उपस्थित थे। आयोजन की अगुवाई विश्वसुंदरी सुधा ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम की शुरुआत भारत और मलेशिया के राष्ट्रगानों के साथ हुई। इसके बाद कन्नड़ कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने सांस्कृतिक उत्सव की शानदार शुरुआत की। भारत, मलेशिया, और अन्य देशों से आए कलाकारों ने गीत-संगीत और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बनाया।
कलाकारों की प्रस्तुतियाँ प्रसिद्ध कलाकार साई कुमार, अभिनेत्री प्रेमा, गायिका मनसा होल्ला, गायक सचिन, और मिमिक्री कलाकार गोपी, साथ ही मलेशिया और बांग्लादेश के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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पुरस्कार और सम्मान विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, और आठ लोगों को “वर्ल्ड बेस्ट कन्नडिगा 2025” अवॉर्ड से नवाजा गया। महिलाओं की शक्ति, सृजनशीलता, और उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए विशेष मंच “शृंगार सभा” का भी आयोजन किया गया।
वर्ल्ड बेस्ट कन्नडिगा अवॉर्ड विजेता 2025
- मेराज अनवर – सेलिब्रिटी फैशन डिजाइनर
- डॉ. नागज्योति नागराजु – चिकित्सा क्षेत्र
- ए. एस. प्रेमनाथ – प्रबंध निदेशक (सेवानिवृत्त), कर्नाटक मिल्क फेडरेशन
- मनसा होल्ला – गायिका एवं निर्देशक
- मिमिक्री गोपी – मिमिक्री कलाकार
- सचिन एस – पार्श्व गायक, संगीतकार, गीतकार, ज़ी कन्नड़ सरिगंपा अवॉर्ड जूरी
- धनंजय – अभिनेता एवं एंकर, बेस्ट प्रेजेंटर 2025
- डॉ. भुवना सी. एन (मानद) – सॉफ्टवेयर उद्यमी एवं समाजसेविका
आयोजन का महत्व “कन्नड़ कहले” ने न केवल कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया, बल्कि भारत और मलेशिया के सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत किया। यह आयोजन एकता, विरासत, और वैश्विक सम्मान का एक यादगार उत्सव साबित हुआ।


